हबीब तनवीर रंगमंच की ऎसी अज़ीम शख्सियत हैं जिन्होंने नाट्य शास्त्र में अपने तरह के नये अध्याय जोड़े । उन्होंने लोक कला और आधुनिक नाट्यकला का अनोखा संयोग कर कला संसार को चमत्कृत कर दिया । लोक परंपराओं की आत्मा को जीवित रखते हुए भी अपनी बात को थियेटर के ज़रिये आम जन तक पहुँचाया जा सकता है ये सहज ही साबित कर दिखाया हबीब तनवीर ने । हालाँकि अब वे नये थियेटर की अगुवाई करने के लिये मौजूद नहीं हैं , लेकिन उनका सृजन अब भी कलाजगत के लिये पथ प्रदर्शक है । हबीब तनवीर ने नया थियेटर के माध्यम से अपने नाटको में न केवल लोक और आदिवासी कलाकारों को अपने साथ जोड़ा बल्कि हाशिये पर रह रहे इन लोगों की आवाज़ अपने नाटकों में बुलंदी से उठाई । इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने हबीब साहब के नाटय संसार से कलाप्रेमियों को रुबरु कराने के लिये नया थियेटर के सहयोग से 21 से 26 नवम्बर 2009 तक छह दिवसीय `हबीब उत्सव´ का आयोजन किया है।
वीथि संकुल के अंतरंग सभागार में नया थियेटर के कलाकारों ने आगरा बाजार की प्रस्तुति दी । नाटक में बाज़ार में छाई मंदी से उबरने की तरकीब को प्रभावी और रोचक अंदाज़ में दिखाया गया है । कथानक के मुताबिक आगरा के बाज़ार में घोर मंदी छाई है और कुछ भी नहीं बिक रहा। एक ककड़ी वाले के दिमाग में यह बात आती है कि यदि कोई कवि उसकी ककड़ी के गुणों को बखानती कविता लिख दे तो बिक्री ज़रूर बढ़ेगी। वो कई शायरों के पास जाता है पर कोई भी इस काम के लिए राज़ी नहीं होता। अंत में वह शायर नज़ीर के पास जाता है जो फौरन उसका काम कर देते हैं। वह नज़ीर की लिखी ककड़ी पर कविता गाता हुआ आता है और उसके यहां ग्राहकों की भीड़ लग जाती है। फिर तो लड्डूवाला, तरबूज वाला आदि सब एक-एक करके वही करते हैं और जल्दी ही सारा बाज़ार नज़ीर के गीतों से गूँजने लगता है। इस मुख्य कथ्य के बीच एक बेरोजगार युवा की कहानी पिरोई गई है जो एक गणिका के फेर में पड़ा हुआ है और जो अंत में उसी पुलिस इन्स्पेक्टर के हत्थे चढ़ता है जिसे कभी प्रेम के खेल में उसने परास्त किया था।´
हबीब तनवीर के कृतित्व पर एकाग्र इस आयोजन में नया थियेटर हबीब तनवीर के विभिन्न नाटकों की प्रस्तुति देगा । 22 नवम्बर को राज रक्त, 23 नवम्बर को सड़क एवं चरणदास चोर, 24 नवम्बर को जिन लाहौर नही वेख्या वो जन्म्या ही नही, 25 नवम्बर को कामदेव का अपना बसंत ऋतु का सपना, तथा 26 नवम्बर को गौहाटी के बॉं-द क्रियेटिव ब्रीज थियेटर ग्रुप द्वारा चरण दास चोर की असमिया प्रस्तुति दी जायेगी। इनमें से `सडक´ की प्रस्तुति दिनांक 23 नवम्बर को पूर्वान्ह 9:30 बजे से तथा शेष नाटकों की प्रस्तुति संग्रहालय के अंतरंग भवन वीथि संकुल सभागार में प्रतिदिन शाम 6 बजे से होगी। इस अवसर पर 22 और 23 नवंबर को हबीब तनवीर पर केंद्रित संगोष्ठी `सुरता हबीब´ तथा 21 से 26 नवम्बर तक हबीब तनवीर के कृतित्व पर एकाग्र छायाचित्र प्रदर्शनी `यादे´ का संयोजन भी किया जायेगा।
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5 टिप्पणियाँ:
मानव संग्रहालय में यह उत्सव निश्चय ही देखने लायक रहा होगा।
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सिर पर मंडराता अंतरिक्ष युद्ध का खतरा।
परी कथाओं जैसा है इंटरनेट का यह सफर।
कला को समर्पित आपके इस सुन्दर चिट्ठे की चर्चा जनसत्ता में पढ़कर यहाँ तक पहुंचा .... बहुत अच्छा लगा यहाँ आकर ...............
इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय द्वारा आयोजित हबीब उत्सव की जानकारी मिलने तक यह ख़त्म हो चुकी है .....अगर आप वहां उपस्थित रहे हों तो उत्सव की एक रिपोर्ट अवश्य पोस्ट कीजियेगा ............
हमारे सामुदायिक चिट्ठे से जुड़ने के लिए मेल करें janokti@gmail.com
कला को समर्पित आपके इस सुन्दर चिट्ठे की चर्चा जनसत्ता में पढ़कर यहाँ तक पहुंचा .... बहुत अच्छा लगा यहाँ आकर ...............
इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय द्वारा आयोजित हबीब उत्सव की जानकारी मिलने तक यह ख़त्म हो चुकी है .....अगर आप वहां उपस्थित रहे हों तो उत्सव की एक रिपोर्ट अवश्य पोस्ट कीजियेगा ............
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kaber ka nam lena to bhut aasan hai pr kbir ke raste pr chlna utna hee kthin hai jaise tslima se is desh ke tathakathit kbiron ne durvyhar kiya hai kya yhi kabiri prmpra aur aastha hai ydi nhi to jihad .kafir jaisi chije htvane ke liye natk kro or likho aatnki kisi nkisi mt se jude hai is schchai ko ujagr kro aurto ki dyniy dsha pr kuchh kho kitne ahm vishy hain kuchh to door kro
dr.vedvyathit
बहुत अच्छी जानकारियों वाला पोस्ट...शुक्रिया..
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